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Monday, 28 September 2015

जय माता जी की खमा घणी ,राम राम,नमस्कार


           जय माता जी की खमा घणी ,राम राम,नमस्कार

                  आप सब का हेल्पडाइल वेबसाइट पर हार्दिक स्वागत हैं। हेल्प डायल वेबसाइट बनाने के पीछे मेरा मकसद सब  की सहायता के लिये सम्पूर्ण जानकारी ऑनलाइन लांना।आज के दौर में सबकुछ ऑन लाइन हैं तो क्यों नहीं ऑनलाइन को मदद का सूत्र बनाया जाये।

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राजस्थान के जिलो में हैल्प डायल के संघठन बनाए जायगे।


          जिसमे हैल्प डायल जनसेवा व जागरूक बनकर जनता की सेवा मैं कार्य करेगी।                 

                                www.helpdail.com

                                        जो लोग राजस्थान से बाहर अर्थात प्रवासी  हैं उनके साथ कोई घटना होती हैं तो सभी राजस्थान वाशी उस परिवार या व्यक्ति को पूर्ण सहयोग देंगे।अभी वर्तमान में मेरे सुनने व देखने मे ऐसी घटनाए आई हैं जिस से लगता हैं की एक दूसरे की एक दूसरे की सार सम्भाल जरूरी हैं।
                                      हेल्प डायल पर सभी विभागों की जानकारी व सभी जरूरी जानकारी समय समय पर डाली जाएगी। किसी के साथ धोखा धडी नहीं हो इस के लिए एक हैल्प लाइन नंबर भी डाला जायेगा। जिससे सभी को सुविधा हो व आने वाले समय में इस नंबर को टोल फ्री रखा जायेगा। हैल्प डायल आगे चल कर नेशनल स्तर पर भी कार्य करेगी। सभी राष्ट्रीय व राज्य व अंतरर्राष्ट्रीय नियम व कानूनो का पालन करेगी। इस वेबसाइट पर मुख्य खबरों की अखबारों व टीवी न्यूज़ वीडियो व हस्त लिखित समाचार भी जिलो से डाले जाएंगे। जिस से देश परदेश की जानकारी मिल सके।
                                     हैल्प डायल पर राजस्थानी त्यौहारो की जानकारी व राजस्थानी परम्पराओ को भी जगह दी जाएगी। राजस्थानी खानपान व पहनावे को भी शामिल किया जाएगा। राजस्थान से बाहर मिलने वाले सम्मान व कितने नेता व अभिनेता हैं। व्यापार के क्षेत्र में जो राजस्थानी हैं उनको प्रकाशित किया जाएगा।
                                    मुंबई,नवी मुंबई,पुणे,बंगलौर,हैदराबाद,सिकंदराबाद,हुबली,चेन्नई,गोवा,नाशिक,सूरत ,अहमदाबाद,वापी सलवास,दादरा नगर हवेली,वलसाड ,पालघर ,पंजाब,हरियाणा,उत्तरप्रदेश ,मध्यप्रदेश ,बिहार ,दिल्ली, व सम्पूर्ण भारत मे रहने वाले प्रवासी भाइयो को हैल्प डायल २४ घंटे टोल फ्री नंबर पर सक्रिय मदद के लिये तैयार रहेगा। हैल्प डायल आप के व्यपार का पता प्रकाशित करने के लिये व्यापारिक पुस्तिका का पेज भी जोड़ चुकी हैं। जिसमें अपना व्यापार का पता डाल कर अपने व्यापार को एक जगह से दूसरी जगह पहचान देवे।

                                   कुल मिला कर हैल्प डायल जनता की जनता के लिये अपनी वेबसाइट हैं।
विशेष : मुंबई,नवी मुंबई ,पुणे ,नाशिक ,बंगलौर ,सूरत अहमदाबाद,वापी,बड़ौदा सहरो में हैल्प डायल कार्यकारणी बनाने जा रही हैं जिसमें अध्यक्ष,उपा अध्यक्ष,सचिव,कोषाध्य्क्ष,प्रचार मंत्री,सहलाकर मंत्री,व करियाकारिणी सदस्य ,व मेंबर भी बनेगे। सभी हैल्प डायल के कायदे और कानून का पालन करेंगे।
                  जायदा जानकारी के लिये हैल्प डायल की पॉलिसी व नियम पढ़े।
  सम्पर्क :7219321980 /07568140240 .ईमेल :rathore201977@gmail.com,info@helpdail.com 

वेबसाइट का काम जारी हैं.......................www.helpdail.com

राजस्थानी फिल्मो का निर्माण व नई फिल्मो की जानकारी व कहानी शामिल की जाएगी


                                          1. हैल्प डायल मेम्बरशिप
                                          2. व्यापार निर्देशिक


वापी मे रहने वाले राजस्थानियों को हैल्प डायल की तरफ से जय माताजी की ,खम्माघणी,राम राम ,जय बाबा की ,
                  आप सब की वेबसाइट हैल्प डायल आप की जरुरत को समझकर कार्य करेगी। मुंबई के सभी उपनगरों में हैल्प डायल की कार्यकारिणी बनेगी। विरार से चर्चगेट,छत्रपति शिवाजी से कसारा/कर्जत,पनवेल,रोहा,दाहणु ,पालघर,बोईसर,सफला,नवी मुंबई मे वाशी,सानपाड़ा,खारघर व सभी मुंबई उपनगरीय में सम्पूर्ण कार्य कारिणी बनेगी।हैल्प डायल का कार्यकर्ता आप के दुकान,गोदाम,फैक्ट्री,फर्म डेयरी ,वे घर पर आता हैं तो अवश्य जुड़े। व्यापार का पता निशुल्क छपेगा।मेम्बरशिप शुल्क लगेगा। माशिक,त्रिमाषिक,वार्षिक,और पांचवर्षीय।सभी सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा।


हैल्प लाइन  नंबर विभाग में आपका स्वागत हैं।
           
        हैल्प लाइन नंबर को  आप आपात काल में प्रोयोग कर सकते हैं किसी भी समस्या में हैं तो जल्द आप के एरिया अधियक्ष का नंबर दिया जाएगा।
संपर्क :07219321980 / 07568140240 ईमेल :rathore201977@gmail.com



                                             मेरी कहानी


मेरी कहानी में आप का स्वागत हैं। आप यहाँ राजस्थानी भाषा में कहानियाँ पढोगे। जिसमे अगर आप के पास कोई कहानी हैं तो मेरे ईमेल पर जरूर भेजे। अगर कहानी जाँच विभाग को सही व सुधारवादी होगी तो प्रकाशित की जाएगी................


                                          

राजस्थान फिल्म निर्माण

   
          जय राजस्थान

 राजस्थान फिल्म निर्माण में आप सभी का स्वागत हैं। राजस्थानी फिल्मे कम बनती हैं और लोग कम देखते हैं। आज प्रत्येक देश राज्य में फिल्म निर्माण बड़ी तेजी से हो रहा हैं लेकिन राजस्थान में राजस्थानी फिल्मो का निर्माण नहीं होता हैं।
                                महाराष्ट्र मे मराठी ,पंजाब में पंजाबी,गुजरात में गुजरती,केरला मे तो साउथ फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड से भी बड़ी हैं। सभी राज्यों की अपनी भाषा हैं परन्तु राजस्थानी भाषा की कोई किताब स्कूल में नहीं चलती। क्यों किया हम अपने राज्य से लगाव नहीं हैं। हैं तो फिर राजस्थानी फिल्म निर्माण कियो नहीं होता। मेरा मानना हैं की राजस्थानी मे फिल्मो का निर्माण होना चाहिए और लोगो को अच्छी फिल्मे देखनी चाहिये।
 किसी राज्य या देश की फिल्म निर्माण कड़ी देश के अर्थव्यवस्था की मुखीय डोर हैं लाखो करोडो टैक्स कई रूप में सरकार को मिलता हैं लेकिन क्या पता पुरे देश में सिर्फ राजस्थान ही एक राज्य हैं जहां फिल्म निर्माण नगण्य हैं।

                            फिल्म निर्माण से रोजगार 


फिल्म निर्माण से लाखो करोडो को रोजगार मिलता हैं। कलाकारों को रोजगार,मेकअप मैन ,निर्देशक ,निर्माता ,संगीतकार,लेखक,गीतकार,ड्रेस निर्माता और न जाने कितने। टीवी टेपरिकॉर्ड, व सभी बड़े बड़े सिनेमा हॉल्स।
   यहा तक की कपड़ो का निर्माण भी फील्मो से तय होता हैं। लेकिन राजस्थान सरकार पता नहीं क्यों राजस्थान में  फिल्म निर्माण को लेकर गम्भीर क्यों नहीं हैं।
                       

                               जयपुर इंटरनेशनल  फिल्म फेस्टिवल- 2014 में हुई चर्चा  


पिछले  जयपुर इइंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में राजस्थानी फिल्म निर्माण पर चर्चा हुई थी। जिसमे राजस्थान सिनेमा हॉल व निर्माता अधियक्ष नन्द भारद्वाज ,हरीश मालू,डी.डी वन निर्देश्क ,मोंटी राठौड़ ,कर्नल पूर्ण  सिंह, 
  मीटिंग का वीडियो नीचे दिया गया हैं 

 www.helpdail.com के मैन पेज youtube  channel per 

Saturday, 19 September 2015

राजस्थान मे फिल्म निर्माण क्यों, नहीं


 सभी राजस्थानीयो भाइयो और बहिनो,  को मेरा नमस्कार ,
 
                    मेरा नाम मोतीसिंह राठौड़ (मोंटी राठौड़ )हैं। मैं जोधपुर राजस्थान से हूँ। मै फिल्म इंडस्ट्री के लिय भारतीय सेना की नौकरी छोड़ कर आया हूँ। कारण शुरू से फिल्मो की तरफ रुझान था। लेकिन इस इंडस्ट्री में आकर पता लगा की राजस्थानी कलाकारों का कोई स्तर नहीं हैं । कारण राजस्थानी फिल्मो व कलाकारों का सही मार्ग दर्शन नहीं हैं ।
                   
                     दोस्तों,मैंने सेकड़ो ऑडिशन दिए लेकिन कॉल कही से नहीं आई। लेकिन फिर मैंने पिछले कई सालो मैं फिल्म इंडस्ट्रीज की पूरी स्टडी की बिना किसी रिटर्न (कमाई) के।  फिल्म निर्माण से जुडी हर बात की जानकारी के लिए  सिखना शुरू किया।

                      मैंने कोई फिल्म इंस्टिट्यूट ज्वाइन नहीं किया क्यों की इंटरनेट की इस दुनिया मैं अगर आप दिल से सीखना चाहते हो तो कोई रोक नहीं सकता। मेरे बच्चे मेरे साथ रहते हैं। मुंबई नगरी में बिना कुछ किए कैसे चलेगा। मने भी सब सोचा और एक ही विचार किया की धन कामना होता सेना की नौकरी कियो छोड़ता,गांव की खेतीबाड़ी और पढ़ाई से और कॉलेज रुतबे से करोडो कमा सकता था। लेकिन अब चाहे भूखा रहना पड़े या कम खाना पड़े कदम पीछे नहीं हटाऊंगा इसका कारण मेरा परिवार व  पत्नी,दो बेटे और एक बेटी ने पूरा साथ देने व हरहलात में रहने की कसम खाली हैं  लेकिन मेरा अपना परिवार  वो दिल और जान से लग  गए।
             
                    मैंने अब स्वयं  के लिए नहीं "राजस्थान फिल्म निर्माण" को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया। जिसमे राजस्थानी फिल्मो का निर्माण कियो नहीं होता होता भी हैं तो ना के बराबर कियो।हर क्षेत्र का अपना रोजगार फंडा होता हैं कोई पुलिस में जाता हैं ,कोई बिज़नेस करता हैं ,कोई दूध की डेरी खोलता हैं,कोई डॉक्टर बनता हैं,कोई सेना में जाता हैं अर्थात हर क्षेत्र में रोजगार हैं और लोग काम करते हैं तो फिर फिल्म निर्माण व फिल्म विभाग से अलेर्जी क्यों । बात फिल्म विभाग में इज्जत नहीं तो मैं पूछता हूँ क्या अन्य विभागों में सब ठीक है नहीं सब जगह कौउए काले हैं अर्थात हर विभाग मे अच्छाई और बुराई हैं।

                  आज भारत के लगभग सभी राज्यों में फिल्म निर्माण हो रहा हैं। बंगाल फिल्म में बंगाली,महाराष्ठ्र में मराठी,उतरप्रदेश में भोजपुरी,केरला में साउथ इंडस्ट्री,पंजाब में पंजाबी ,गुजरात में गुजरती ,और अन्य। लेकिन राजस्थान में न तो भाषा राजस्थानी हैं और न राजस्थानी फिल्मो का निर्माण।
               

                               फिल्मो से मिलता हैं लाखो को रोजगार 

                                                               
फिल्म निर्माण से लाखो करोडो लोगो को रोजगार मिलता हैं। आज रियल एस्टेट हो या गोल्ड बिज़नेस हर तरफ फिल्म निर्माण ही वो जरिया हैं जिससे सरकार और विभागों को बिज़नेस मिलता हैं। जब कोई कलाकार नई साड़ी किसी सीरियल या फिल्म में पहनती हैँ तो अगले दिन बाजार में उस साड़ी की ब्रांड बिकती हैं। जोधा अकबर के टाइम मैं करोडो अरबो रुपयो की जोधा अकबर साड़िया बिकी थी। कोई मेकअप से ,कोई कपड़ो से कोई कला दिखा कर,कोई लेखक बनकर ,कोई संगीत देकर कोई लोकेशन दिखा कर कोई फिल्म निर्माण कर के ,अर्थात लाखो रोजगार हैं। बड़ी शर्म की बात हैं की पहेली फिल्म कई लेखक राजस्थानी थे लेकिन लाभ उठाया हिंदी व दुसरो ने किया यह राजथानी कलाकारों व राजस्थानी फिल्म निर्माण में सतौला वव्यहार नहीं हैं 

                                  राज्य का विकास फिल्म निर्माण पर 

                                                               
                      जो राज्य विकसित हैं वहा नजर उठा कर देखलो वो पढ़ा लिखा और विकसित हैं। अर्थात फिल्म निर्माण विकास की धुरी का भी काम करता हैं  ५१% कर केवल फिल्म विभाग ही देता हैं। राज्य सरकारों को करोडो का कर मिलता हैं जिसमे सरकार तो केवल इजाजत के कमाती हैं। सरकार को अब राजस्थानी फिल्म निर्माण को गंभीरता से लेना चाहिए।सरकार को अब अचछी सब्सिडी देनी चाहीए।

                              फिल्मो का निर्माण हैं भाषा के विकास में अहम  

          जिन राज्यों में फिल्म निर्माण विकसित हैं। उन राज्यों की भाषा भी शैली बद हैं। राज्यों के लोगो को भाषा से लगाव हैं। बड़ी शर्म की बात हैं की इतना बड़ा राज्य राजस्थान जिसकी गाथाएँ विशव में प्रसिद हैं लेकिन भाषा में पिछड़ गयें। क्यों।  क्यों  की हम स्वयं अपने राज्य का विकास रोक रहे हैं.सुनने मे आता हैं की फिल्म निर्माण से  बिगड़ापन आता हैं तो फिर कियो टीवी,फिल्म हॉल ,केबल,और आज तो मोबाइल इन सब को राज्य में पाबंद कर दो। 
                       मेरा सरकार से हाथ जोड़ कर निवेदन हैं की अब राजस्थानी फिल्म निर्माण को बढ़ाना होगा इस के बारे में सोचे। 

                       आज तक  पिछले १०० सालो मे मात्र सौ राजस्थानी फिल्म बनी 

                                                                         
                          पिछले १०० सालो में मात्र १०० राजस्थानी फिल्म बनी,क्यों।  क्यों की हमारी शिक्षा नीति सिर्फ पेटपालने की हैं युग निर्माण और भविष्य निर्माण में आगे कदम बढ़ाने की नहीं।कौन आएगा,हम ही तो कदम बढ़ाएंगे तब होगा। कोई दूसरा या बाहरी नहीं आएगा। 

                   मैं इसी कड़ी को आगे बढ़ाने के लिये राजस्थानी फिल्म फेस्टिवल व राजस्थानी स्टेज प्रोग्रामो  का आयोजन करने जा रहा हूँ आशा करता हूँ की आप सभी राजस्थान वासी  भी इस में योगदान देंगे। आयोजन राजस्थान व देश और दुनीया में सब जगहे होँगे। 
                         यह आयोजन राजस्थान फिल्म डेवलपमेंट एसोसिएशन करेगा। 
       यदि आप राजस्थानी फिल्म निर्माण में रूचि रखते हैं और इस कड़ी में जुड़ कर राजस्थानी फिल्मो को देश और दुनिया में पहुंचने में सहयोग करे व एसोसिएशन से  जुड़े


  सम्पर्क :07219321980 /07568140240
              Email:- rathore201977@gmail.com
         

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