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Saturday, 19 September 2015

राजस्थान मे फिल्म निर्माण क्यों, नहीं


 सभी राजस्थानीयो भाइयो और बहिनो,  को मेरा नमस्कार ,
 
                    मेरा नाम मोतीसिंह राठौड़ (मोंटी राठौड़ )हैं। मैं जोधपुर राजस्थान से हूँ। मै फिल्म इंडस्ट्री के लिय भारतीय सेना की नौकरी छोड़ कर आया हूँ। कारण शुरू से फिल्मो की तरफ रुझान था। लेकिन इस इंडस्ट्री में आकर पता लगा की राजस्थानी कलाकारों का कोई स्तर नहीं हैं । कारण राजस्थानी फिल्मो व कलाकारों का सही मार्ग दर्शन नहीं हैं ।
                   
                     दोस्तों,मैंने सेकड़ो ऑडिशन दिए लेकिन कॉल कही से नहीं आई। लेकिन फिर मैंने पिछले कई सालो मैं फिल्म इंडस्ट्रीज की पूरी स्टडी की बिना किसी रिटर्न (कमाई) के।  फिल्म निर्माण से जुडी हर बात की जानकारी के लिए  सिखना शुरू किया।

                      मैंने कोई फिल्म इंस्टिट्यूट ज्वाइन नहीं किया क्यों की इंटरनेट की इस दुनिया मैं अगर आप दिल से सीखना चाहते हो तो कोई रोक नहीं सकता। मेरे बच्चे मेरे साथ रहते हैं। मुंबई नगरी में बिना कुछ किए कैसे चलेगा। मने भी सब सोचा और एक ही विचार किया की धन कामना होता सेना की नौकरी कियो छोड़ता,गांव की खेतीबाड़ी और पढ़ाई से और कॉलेज रुतबे से करोडो कमा सकता था। लेकिन अब चाहे भूखा रहना पड़े या कम खाना पड़े कदम पीछे नहीं हटाऊंगा इसका कारण मेरा परिवार व  पत्नी,दो बेटे और एक बेटी ने पूरा साथ देने व हरहलात में रहने की कसम खाली हैं  लेकिन मेरा अपना परिवार  वो दिल और जान से लग  गए।
             
                    मैंने अब स्वयं  के लिए नहीं "राजस्थान फिल्म निर्माण" को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया। जिसमे राजस्थानी फिल्मो का निर्माण कियो नहीं होता होता भी हैं तो ना के बराबर कियो।हर क्षेत्र का अपना रोजगार फंडा होता हैं कोई पुलिस में जाता हैं ,कोई बिज़नेस करता हैं ,कोई दूध की डेरी खोलता हैं,कोई डॉक्टर बनता हैं,कोई सेना में जाता हैं अर्थात हर क्षेत्र में रोजगार हैं और लोग काम करते हैं तो फिर फिल्म निर्माण व फिल्म विभाग से अलेर्जी क्यों । बात फिल्म विभाग में इज्जत नहीं तो मैं पूछता हूँ क्या अन्य विभागों में सब ठीक है नहीं सब जगह कौउए काले हैं अर्थात हर विभाग मे अच्छाई और बुराई हैं।

                  आज भारत के लगभग सभी राज्यों में फिल्म निर्माण हो रहा हैं। बंगाल फिल्म में बंगाली,महाराष्ठ्र में मराठी,उतरप्रदेश में भोजपुरी,केरला में साउथ इंडस्ट्री,पंजाब में पंजाबी ,गुजरात में गुजरती ,और अन्य। लेकिन राजस्थान में न तो भाषा राजस्थानी हैं और न राजस्थानी फिल्मो का निर्माण।
               

                               फिल्मो से मिलता हैं लाखो को रोजगार 

                                                               
फिल्म निर्माण से लाखो करोडो लोगो को रोजगार मिलता हैं। आज रियल एस्टेट हो या गोल्ड बिज़नेस हर तरफ फिल्म निर्माण ही वो जरिया हैं जिससे सरकार और विभागों को बिज़नेस मिलता हैं। जब कोई कलाकार नई साड़ी किसी सीरियल या फिल्म में पहनती हैँ तो अगले दिन बाजार में उस साड़ी की ब्रांड बिकती हैं। जोधा अकबर के टाइम मैं करोडो अरबो रुपयो की जोधा अकबर साड़िया बिकी थी। कोई मेकअप से ,कोई कपड़ो से कोई कला दिखा कर,कोई लेखक बनकर ,कोई संगीत देकर कोई लोकेशन दिखा कर कोई फिल्म निर्माण कर के ,अर्थात लाखो रोजगार हैं। बड़ी शर्म की बात हैं की पहेली फिल्म कई लेखक राजस्थानी थे लेकिन लाभ उठाया हिंदी व दुसरो ने किया यह राजथानी कलाकारों व राजस्थानी फिल्म निर्माण में सतौला वव्यहार नहीं हैं 

                                  राज्य का विकास फिल्म निर्माण पर 

                                                               
                      जो राज्य विकसित हैं वहा नजर उठा कर देखलो वो पढ़ा लिखा और विकसित हैं। अर्थात फिल्म निर्माण विकास की धुरी का भी काम करता हैं  ५१% कर केवल फिल्म विभाग ही देता हैं। राज्य सरकारों को करोडो का कर मिलता हैं जिसमे सरकार तो केवल इजाजत के कमाती हैं। सरकार को अब राजस्थानी फिल्म निर्माण को गंभीरता से लेना चाहिए।सरकार को अब अचछी सब्सिडी देनी चाहीए।

                              फिल्मो का निर्माण हैं भाषा के विकास में अहम  

          जिन राज्यों में फिल्म निर्माण विकसित हैं। उन राज्यों की भाषा भी शैली बद हैं। राज्यों के लोगो को भाषा से लगाव हैं। बड़ी शर्म की बात हैं की इतना बड़ा राज्य राजस्थान जिसकी गाथाएँ विशव में प्रसिद हैं लेकिन भाषा में पिछड़ गयें। क्यों।  क्यों  की हम स्वयं अपने राज्य का विकास रोक रहे हैं.सुनने मे आता हैं की फिल्म निर्माण से  बिगड़ापन आता हैं तो फिर कियो टीवी,फिल्म हॉल ,केबल,और आज तो मोबाइल इन सब को राज्य में पाबंद कर दो। 
                       मेरा सरकार से हाथ जोड़ कर निवेदन हैं की अब राजस्थानी फिल्म निर्माण को बढ़ाना होगा इस के बारे में सोचे। 

                       आज तक  पिछले १०० सालो मे मात्र सौ राजस्थानी फिल्म बनी 

                                                                         
                          पिछले १०० सालो में मात्र १०० राजस्थानी फिल्म बनी,क्यों।  क्यों की हमारी शिक्षा नीति सिर्फ पेटपालने की हैं युग निर्माण और भविष्य निर्माण में आगे कदम बढ़ाने की नहीं।कौन आएगा,हम ही तो कदम बढ़ाएंगे तब होगा। कोई दूसरा या बाहरी नहीं आएगा। 

                   मैं इसी कड़ी को आगे बढ़ाने के लिये राजस्थानी फिल्म फेस्टिवल व राजस्थानी स्टेज प्रोग्रामो  का आयोजन करने जा रहा हूँ आशा करता हूँ की आप सभी राजस्थान वासी  भी इस में योगदान देंगे। आयोजन राजस्थान व देश और दुनीया में सब जगहे होँगे। 
                         यह आयोजन राजस्थान फिल्म डेवलपमेंट एसोसिएशन करेगा। 
       यदि आप राजस्थानी फिल्म निर्माण में रूचि रखते हैं और इस कड़ी में जुड़ कर राजस्थानी फिल्मो को देश और दुनिया में पहुंचने में सहयोग करे व एसोसिएशन से  जुड़े


  सम्पर्क :07219321980 /07568140240
              Email:- rathore201977@gmail.com
         

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